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नींबू घास: मुहांसे की दवा के साथ मुनाफे का सौदा, खेत में ही हो जाती है बिक्री
बुखार, कफ और मुहांसे में फायदेमंद


लखनऊ: तेल, सौंदर्य प्रसाधन, साबुन और डिटर्जेंट बनाने में उपयोग होने वाली नींबू घास किसानों के लिए कम लागत में अच्छा फायदा देने वाली खेती है। इसकी खेती से किसानों को सिंचित खेत में दो लाख प्रति हेक्टेयर और असिंचित क्षेत्र में 90 हजार प्रति हेक्टेयर का शुद्ध मुनाफा दे सकता है। 

यह ऐसा पौधा है, जो एक बार लगाने के बाद तीन साल तक कटाई की जाती है। इसकी विधिवत खेती केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश (लखनऊ, बुंदेलखंड, कानपुर) एवं राजस्थान राज्यों में हो रही है।

बुखार, कफ और मुहांसे में फायदेमंद

चाय के साथ लेने पर बुखार, कफ और सर्दी में फायदा करने वाली लेमन घास का पौध रोपण का यही उपयुक्त समय है। यह जुलाई माह तक किया जाता है। बार-बार काटे जाने वाली इस घास के लिए औसत उर्वरता वाला खेत उपयुक्त होता है। असिंचित खेत में इसे 45 गुणे 30 सेमी की दूरी पर लगाना उपयुक्त होता है, जबकि सीचिंत क्षेत्र में 60 सेमी की दूरी पर पौधरोपण किया जाता है। इसमें कुछ ऐसे गुण भी होते हैं, जो मुंहासे ठीक करने में लाभदायक हैं। यह ब्लड प्रेशर भी कम करता है। कैरीबियाई लोग इसे स्वीटरश या फीवर ग्रास भी कहते हैं।

खेत में पानी न जमा हो

खेत की तैयारी के संबंध में केंद्रीय औषधीय एवं संगध पौधा संस्थान ‘सीमैप’ के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज सेमवाल ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ को बताया कि इसकी रोपाई के समय खेत में 150:60:60  किग्रा नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश प्रतिवर्ष प्रतिहेक्टयर डालना चाहिए। नत्रजन को तीन चार बार में भूमि में पर्याप्त नमी की स्थिति में देना चाहिए। असिंचित अवस्था में खाद की आधी मात्रा कर देनी चाहिए। यह ध्यान देना जरूरी है कि खेत में पानी इकट्ठा न हो वरना फसल को नुकसान पहुंचाता है। आर्गेनिक खाद का प्रयोग भी उत्साहजनक परिणाम देता है। गोबर की खाद इसके लिए उपयोगी होती है।

खेत में ही पहुंच जाते हैं कंपनियों के बिचौलिये

उन्होंने कहा कि इसकी बाजार में बिक्री में कोई दिक्कत नहीं है। पैदावार होते ही हर जगह कंपनियों के बिचौलिये हैं। वे लोग खेत में ही पहुंचकर सौदा कर लेते हैं। साल में दो से तीन बार कटाई वाली इस घास से किसान को अच्छी आमदनी हो जाती है। इसकी सिंचित खेती में 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का खर्च है, जबकि कुल आय ढाई लाख रुपये से अधिक है। असिंचित खेत में भी शुद्ध मुनाफा 90 हजार के लगभग हो जाता है।

नर्सरी तैयार करना

सीमैप’ के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज सेमवाल ने बताया कि लेमन घास का बीज मानसून की शुरुआत में मिट्टी की एक पतली परत के साथ कवर किया जाता है। वर्षा का यदि अभाव हो तो नर्सरी में पानी देना चाहिए। प्रति हेक्टेयर के लिए 10 किलोग्राम पर्याप्त है। बीज 5-6 दिनों में उत्पन्न हो जाता है और जब बीज 60 दिन पुरानी हो जाती है, तब रोपाई करनी चाहिए।

पौधे की राेपाई

गोंडा मंडल के उप निदेशक उद्यान, अनीस श्रीवास्तव ने बताया कि बीज 60 पंक्तियों में 45 से 60 सेमी की दूरी पर 70 सेमी की दूरी पर लगाए जाते हैं। यह बेहतर बारिश की उच्च दर प्राप्त करने में सक्षम होती है। लेमन ग्रास एक हर प्रकार की मिट्टी में उपजाऊ फसल है। इसके बेहतर खाद के रूप में लकड़ी राख 10 टन की दर से 2 टन की दर से उपयोग प्रति हेक्टेयर है। 

कीट प्रबधंन

सीमैप’ के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज सेमवाल ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ को बताया कि लेमन ग्रास को कई कीट हानि पहुंचाते हैं। इसमें एक चिलोत्रे प्रजाति है। हमले का पहला लक्षण है मुख्य पत्तियों का सूखना, इसके बाद पूरे शूट मर जाता है। उन्होंने बताया कि नियंत्रण उपायों से गर्मियों में सीजन के दौरान आग पर सूखी स्तुब्ब्लेस को स्थापित करने के लिए स्तुब्ब्लेस के अंदर गुप्त कातेर्पिल्लार्स को नष्ट कर, बाहर खींच और प्रभावित जगह पर असर करता है। गंभीर इन्फ़ेस्ततिओन के मामले में नीम का काढ़ा गौमूत्र के साथ मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।


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