लातूर में 126 साल में पहली बार नहीं हुआ गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन
नगर निगम ने इन प्रतिमाओं को मंदिरों में रखने की व्यवस्था की है।


लातूर : महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित मराठवाड़ा अंचल के लातूर जिले में इस बार गणेश प्रतिमाओं का जल में विसर्जन नहीं किया गया है। जिला प्रशासन ने पानी की कमी के कारण इस साल 10 हजार से अधिक गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं करने का निर्णय लिया। नगर निगम ने इन प्रतिमाओं को मंदिरों में रखने की व्यवस्था की है। 126 साल में यह पहली बार है जब महाराष्ट्र के किसी जिले में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन जल में नहीं किया गया है। 

जिलाधिकारी जी. श्रीकांत के मुताबिक प्रतिमा विसर्जन न करने का फैसला जनजागरुकता की वजह से लिया गया। गणेश मंडलों की बैठक के बाद ही यह निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि यह फैसला केवल पानी की कमी की वजह से नहीं लिया गया। बड़े गणेश मंडल एक ही प्रतिमा को तीन से चार साल तक दोबारा स्थापित कर रहे हैं। यह गणेश मंडलों का सामूहिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि यदि प्रतिमाओं को दोबारा स्थापित या इनका पुनर्चक्रण किया जाता है तो यह जल संकट का सामना करने का अच्छा उपाय होगा। 

राज्य कि राजधानी मुंबई से 500 किमी. की दूरी पर स्थित लातूर सूखे के चलते हमेशा सुर्खियों में रहता है। इस वर्ष लातूर में औसतन 45 प्रतिशत बारिश हुई है। उल्लेखनीय है कि बाल गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र में वर्ष 1893 में समाज में समरसता की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिमा स्थापना पर बल दिया था।

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