मिस इंडिया खादी फैशन शोज ने यूथ में ‘खादी के कपड़ो के प्रति’ बढाई जिज्ञासा : गार्गी
Gargi Raj


लखनऊ : खादी के कपडे यानि भारत का अपना स्वदेशी ब्रांड, पर स्वदेशी होने के बाद भी ये आज के दौर में फैशन का विकल्प नहीं बन पाया अब जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘खादी फार नेशन’ का स्लोगन दिया है तो इस कड़ी में हमारा-आपका भी फर्ज है कि हम अपने स्वदेशी ब्रांड को फैशन की दुनिया का नंबर वन ब्रांड बनाये. इसी के मद्देनजर पायनियर एलायंस आपको मिलवायेगा उन मॉडल्स से जो खादी के कपड़ों को प्रमोट करने के लिए खादी ग्राद्योग व मिस खादी इंडिया दवारा पूरे भारत में कराये जा रहे फैशन शोज का हिस्सा रही है. इन माडल्स के जरिये हम आपको बतायेंगे कि किस तरह खादी के कपडे धीरे-धीरे ही सही पर अब फैशन का सिम्बल बनते जा रहे है. इस कड़ी आज हम आपकी मुलाकात करायेंगे मिस खादी उड़ीसा गार्गी से और जानेगें खादी के प्रति उनके रुख को.....

सवाल : मिस खादी इंडिया में पार्टिसिपेट करके कैसा लग रहा है? 

जवाब : पहली बात मैं अभी अभी अपने घर से बाहर निकली हूँ और मिस इंडिया खादी मेरे लिए एक अलग ही प्लेटफार्म था जहाँ मुझे पता चला कि खादी के कपडें भी बहुत ही फ्रेंडली व स्मूथ बन सकते है और अभी धीरे धीरे ये और स्मूथ व फ्रेंडली बन रहे है. आज के दौर में नया यूथ है नई जनरेशन है पर जहाँ तक बाद मेरी है मुझे खादी का कपडा पहनकर बहुत अच्छा लगा. मैं गाउन पहनी थी खादी का. पर आप यकीन नहीं मानेगे कि मुझे खुद भी ये यकीन नहीं हो रहा था कि खादी का कापड़ा इतना क्यूट व कम्फर्टेबल हो सकता है. तो एक तरह से आप कहा सकते है इसका एक्सपीरियंस मेरे लिए बहुत ही अच्छा था और इसका पार्ट बनना मेरी लिए बहुत ही लकी था.

सवाल : कोई ऐसा कॉम्प्लिमेंट/अनुभव जो मिस खादी इंडिया में पार्टिसिपेट करने के बाद आपके लिए सबसे ज्यादा रोचक रहा? 

जवाब : मैं आपको पहले बता दूँ कि मै फ्रेशर थी अपनी कालेज में इस कंपिटिशन में मै स्टेट उड़ीस की विजेता थी. तो मेरे लिए मेरे दोस्तों का पहला कम्प्लिमेंट यही था कि तुम इसलिए चुनी गयी हो क्योकि तुम्हारा एक इंडियन फेस है तुम्हरी इंडियन चाल ढाल थी और तुम्हारा बात करने का तरीका भी बहुत ही प्यारा था. बेसिकली खादी गाउन में तुम एकदम इंडियन स्वीट् गर्ल जैसी दिख रही थी. ये कम्प्लिमेंट मेरे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण था.

सवाल : खादी के कपड़ो को प्रमोट  करने के लिए आप अपने लेवल पर क्या कर रही है ?    

जवाब : खादी एक ऐसा कपडा है जो अभी स्टार्टिंग पॉइंट पर आया हुआ है हमारे प्राइम मिनिस्टर की वजह से और हम एक ऐसी जनरेशन में है जो टेक्नालोजी के दौर है तो खादी को प्रमोट करने के लिए मेरे लिए पहला आप्शन टेक्नालोजी है जैसे सोशल मीडिया है जहाँ पर मैं खादी फैशन शोज के वीडियोज डालकर, खादी के जानकारी शेयर करके लोगो के बीच में खादी को प्रमोट कर सकती हूँ 

सवाल : खादी के कपड़ों पर प्रधानमंत्री के समर्थन पर आप क्या कहना चाहेंगी ?

जवाब : हमारे प्रधानमंत्री एक फैशन आइकन है बेसकली हम यूथ के लिए. हम उन्हें फालो करते है तो जिस तरह का सहयोग अभी उन्होंने किया है खादी को लेकर वो काफी कारगर होगा क्योकि हम नई पीढ़ी है और हमे एक फैशन आइकन चाहिए जो कि नरेन्द्र मोदी जी है इसलिए खादी पर उनका समर्थन बहुत ही उत्साहवर्धक है इसके बिना तो कुछ हो ही न पाता. अब जब प्रधानमंत्री खादी को पहन रहे है तो हमे तो उसे पहनना ही होगा. 

सवाल: क्या आपको लगता है कि पीएम के खादी फार नेशन के आने के बाद फैशन में कुछ परिवर्तन हुआ है   

जवाब : खादी फार नेशन जो पीएम का स्लोगन है वो सच में बहुत ही कारगर कम कर रह है. आप यकीन नहीं करेंगे अब जब मैं दूसरे शोज में जाती हूँ हमारे डिजाईनर्स कहते है मिस इंडिया खादी हुआ था ना उड़ीसा में. चलो एक काम करते है सारा कपडा है उड़ीसा का पहनो और उप्पर से खादी का जैकेट डाल लो उसमे तुम लोग बहुत प्यारे लगोगे. खादी अब धीरे-धीरे एक क्लासी चीज माना जा रहा है. जितने लोग क्लासी बनना चाहते है वो चाहतें है कि उन्हें खादी ही मिले. यानि अगर सीधे शब्दों में कहूँ तो खादी के कपडें आने वाले समय में फैशन का सिम्बल बनते दिख रहे है 

सवाल : आज मिस इंडिया खादी 200 से अधिक यूनिवर्सिटी में  और 500 डिजाइनर्स के साथ काम कर चुका है इसका कितना फायदा हुआ खादी और विलेज इंडस्ट्री को?
 
जवाब : देखिये ! फायदा ये हुआ कि खादी एक ऐसा कपडा है जो हाथ से बुना जाता है और सिर्फ हाथ से ही बनाया जा सकता है तो इस समय जितने भी लोग खादी बना रहे है उनका बहुत बड़ा फायदा हो रहा है और होता जायेगा क्योकि जितना हम एडवरटाईज कर रहे है, जितने भी फैशन शोज अब तक हुए है उससे लोगों को पता चला रहा है कि खादी एक कपडा है जो शाई कपडा है, क्लासी कपडा है खादी. इसलिए लोग खादी पहनना चाह रहे है. और पहनने के लिए उसे बनवाना पड़ेगा, खरीदना पड़ेगा तो ये फ़ायदा साफ़ साफ़ उन लोगो को पहुँच रहा है जो कि खादी कपडा बुन रहे, बना रहे अपनी मेहनत से. 




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