दैनिक जीवन में आध्यात्म जरूरी : प्रो सेमटेन
भारत सरकार ने उन्हें शिक्षा में उनके योगदान के लिए 2009 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया.


लखनऊ : आज के दौर में जहाँ हम लोग भौतिकवाद अध्यात्म को पूर्वाग्रह की तरह पालन करते हैं. वहीं हमारे शरीर की आत्मा के लिए यह हमेशा एक प्रेरणा देता है कि कोई ऐसा व्यक्ति जो हमें आध्यात्मिक मार्गदर्शन और प्रकाश की ओर ले जाए.



पद्मश्री गैरों नगा वांग सैमटेन एक तिब्बती शिक्षाविद् हैं जो तिब्बतविज्ञानी और तिब्बती अध्ययन के लिए जाने जाते हैं वह सारनाथ एवाराणसी स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति हैं. भारत सरकार ने उन्हें शिक्षा में उनके योगदान के लिए 2009 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया. 



पद्मश्री सेमटेन की बातों को सुनकर फ्लो लखनऊ चैप्टर के सदस्यों और मेहमानों को ऐसा लगा कि वे सभी एक ऐसी जगह पर पहुंच गए हैं  जहाँ शांति और तन्मयता जीवन का एक तरीका हैए जहाँ अहिंसा एक विकल्प नहीं बल्कि एक अनिवार्यता है।



माधुरी हलवासिया, चेयरपर्सन एफएलओ लखनऊ चैप्टर ने कहाए इस तरह के एक महान विद्वान और विचारक को सुनकर हमने अपनी चेतना के क्षितिज को व्यापक किया और हमें अपनी सहज भावनात्मक बुद्धिमत्ता का उपयोग करके अधिक संवेदनशील और संतुलित निर्णय लेने की शिक्षा ली.



इस आयोजन की अध्यक्षता नीता मोदी ने की जोकि एक स्थापित सामाजिक कार्यकर्ता और बौद्ध धर्म की अनुयायी हैं.

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