डेढ़ करोड़ छात्रों में इस बार भी समय पर जूते-मोजे नहीं बांट पाएगी सरकार
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लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्राइमरी स्कूल के छात्रों को जुलाई के पहले हफ्ते में ही जूते-मोजे बांट दिए जाएं. इसके तहत प्रदेश के डेढ़ करोड़ से अधिक छात्रों को जूते-मोजे बांटे जाने हैं. लेकिन टेंडर को लेकर चल रहे विवाद के कारण ऐसा कैसे हो पाएगा? यह बड़ा सवाल है.

असल में यह सारी समस्या बेसिक शिक्षा विभाग की मनमानी की वजह से सामने आई है. एक तरफ तो विभाग ने टेंडर में शर्त रखी कि कोई भी कंपनी अगर कुल बांटे जाने वाले जूते-मोजे के 25 प्रतिशत से कम की सप्लाई करेगी तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी. लेकिन जब टेंडर में एक कम्पनी ने सबसे कम 115.54 रुपये की दर से 60 प्रतिशत काम अकेले करने की सहमति दे दी तो विभाग खुद ही अपनी बात से पलट गया. अब विभाग ने 10 कंपनियों को टेंडर देने का निर्णय करके सभी से 10-10 परसेंट जूते की सप्लाई लेने की बात कही है.

इसी वजह से सबसे कम दाम देने वाली कंपनी ने पहले मुख्यमंत्री के यहां शिकायत दर्ज कराई और फिर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में रिट फाइल की. बेसिक शिक्षा विभाग और वाली कंपनियों के बीच विवाद के चलते अब तक फर्मों ने काम नहीं शुरू किया है. अब देखना यह है कि यह विवाद कब सुलझेगा और कब छात्रों को जूते-मोजे मिलेंगे?

जून का आधा महीना बीत चुका है. ऐसे में इतना लगभग तय है कि इस बार भी समय से छात्रों को जूते-मोजे नहीं मिल पाएंगे. मालूम हो कि पिछले साल जब इस योजना को शुरू किया गया तब भी विभाग की लापरवाही से नवंबर-दिसंबर तक जूतों की सप्लाई होती रही थी. इतना ही नहीं छात्रों को दिए गए जूते इतने घटिया निकले कि चंद महीनों में ही फटने लगे थे.

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