अगर आपके मोबाइल में हो गया है स्टोरेज फुल तो ना लें टेंशन, करें ये काम फोन हो जाएगा खाली

मोबाइल वर्तमान में हमारी लाइफ का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। घर से लेकर दफ्तर तक और पढ़ाई से लेकर एंटरटेनमेंट तक सभी काम अब मोबाइल से हो रहे हैं।

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लेखक की कलम से : इरादे क्या थे उमर खालिद-शेहला रशीद के

लेखक की कलम से : इरादे क्या थे उमर खालिद-शेहला रशीद के

कुछ हफ्ते पहले ही राजधानी के अखबारों में तिहाड़ जेल की तरफ जाते हुए दिल्ली में इस साल के शुरू में भड़के दंगों के मुख्य अभियुक्त उमर खालिद के माता-पिता और बहन को दिखाया गया था। सच में उस चित्र को देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान का मन उदास हो गया था कि किस तरह से एक पुत्र के कुकृत्यों के कारण उसके पूरे परिवार वाले धक्के खाते फिरते हैं।

07-Dec-2020

लेखक की कलम से : कोरोना की दूसरी लहरःसतर्कता से ही टलेगा खतरा

लेखक की कलम से : कोरोना की दूसरी लहरःसतर्कता से ही टलेगा खतरा

कोरोना का संकट फिर से गहराने लगा है। वजह मौसम में बदलाव और तीज-त्योहार एवं शादी-ब्याह के मौके पर लोगों द्वारा बरती जा रही लापरवाही दोनों ही हैं। करीब 90 प्रतिशत आबादी द्वारा कहीं न कहीं न तो दो गज की दूरी का ख्याल रखा जा रहा है न मास्क है जरूरी यह बात समझी जा रही है।

24-Nov-2020

लेखक की कलम से : किसे चाहिए अखिल भारतीय मुस्लिम पार्टी

लेखक की कलम से : किसे चाहिए अखिल भारतीय मुस्लिम पार्टी

बिहार विधान सभा के चुनावों पर न जाने क्यों देश के कथित सेक्युलरवादियों की खास नजरें थीं। वे महागठबंधन के हक में लगातार ही हर प्रकार से लिख -बोल रहे थे। पर उनका अफसोस यह रहा कि नतीजे उनके मन माफिक नहीं आए।

24-Nov-2020

लेखक की कलम से : ब्रिक्स को कमजोर करता चीन

लेखक की कलम से : ब्रिक्स को कमजोर करता चीन

दुनिया भर में आतंकवाद से लड़ने के मामले में भारत को छोड़कर शेष ब्रिक्स देशों की लुंजपुंज नीति इसकी उपयोगिता पर ही सवाल खड़े करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए दुनियाभर में आतंकवाद के बढ़ते खतरों पर अपनी चिंता जताते हुए संकेतों में ही सही चीन और पाकिस्तान को आडें हाथों लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी ।

20-Nov-2020

लेखक की कलम से : देश को चाहिए प्रेमजी, सानिया, बख्त अब्दुल कलाम जैसे मुसलमान

लेखक की कलम से : देश को चाहिए प्रेमजी, सानिया, बख्त अब्दुल कलाम जैसे मुसलमान

कभी-कभी मुझे इस बात की हैरानी होती है कि क्यों हमारे ही देश के मुसलमानों का एक बड़ा तबका नकारात्मक सोच का शिकार हो चुका है? इन्हें फ्रांस में गला काटने वाले के हक में तो बढ़-चढ़कर बोलना होता है, पर ये मोजम्बिक में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा दर्जनों मासूम लोगों का जब कत्लेआम होता है तब ये चुप रहते हैं।

16-Nov-2020

लेखक की कलम से : बिहार में राम मंदिर-सुशासन भारी पड़ा सब पर

लेखक की कलम से : बिहार में राम मंदिर-सुशासन भारी पड़ा सब पर

बिहार में राष्ट्रीय जनतात्रिक गठबंधन (एनडीए) को विधान सभा चुनावों में मिली सफलता ने तो यह सिद्ध कर ही दिया कि अब बिहार की 12 करोड़ प्रबुद्ध जनता लालू-राब़ड़ी देवी के जंगलराज में फिर से वापस जाने के लिए तैयार नहीं है।

13-Nov-2020

फिर आने वाली कोई बड़ी आपदा, केदारनाथ से ज्यादा भयानक होगा मंज़र !

फिर आने वाली कोई बड़ी आपदा, केदारनाथ से ज्यादा भयानक होगा मंज़र !

लद्दाख जाना लोगों का सपना होता है, वहां की खूबसूरती वादियां हर किसी को लुभाती हैं, लेकिन क्या हो अगर इस खूबसूरत नज़ारे को किसी की नज़र लग जाए तो

10-Nov-2020

राष्ट्रपति कोई बने, भारत-अमेरिका तो रहेंगे करीब ही

राष्ट्रपति कोई बने, भारत-अमेरिका तो रहेंगे करीब ही

अब तो लगभग यह निश्चित सा यही लग रहा है कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस के दिन अब पूरे हो गए हैं। वे फिर से राष्ट्रपति पद पर आसीन नहीं हो सकेंगे।

07-Nov-2020

लेखक की कलम से: फ्रांस में निर्दोषों का गला काटने वालों का भारत में साथ देनेवाले कौन

लेखक की कलम से: फ्रांस में निर्दोषों का गला काटने वालों का भारत में साथ देनेवाले कौन

अब यह तो सरासर ज्यादती ही कही जाएगी I कि भारत से हजारों मील दूर फ्रांस में सरकार और कठमुल्लों के बीच चल रही तनातनी के खिलाफ भारत के मुसलमानों का एक वर्ग भी आग बबूला हो उठे ।

03-Nov-2020

 लेखक की कलम से : यूपी : उप-चुनाव नतीजे तय करेंगे 2022 की सियासी जमीन

लेखक की कलम से : यूपी : उप-चुनाव नतीजे तय करेंगे 2022 की सियासी जमीन

उत्तर प्रदेश की सात विधानसभा सीटों के उप-चुनाव के लिए मतदान कल यानी 03 नवंबर को होगा। दस को नतीजे आ जाएंगे।संभवता करीब डेढ़ वर्ष बात होने वाले उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव से पूर्व यह अंतिम उप-चुनाव होगा.

02-Nov-2020

 लेखक की कलम से : फ्रांस में निर्दोषों का गला काटने वालों का भारत में साथ देनेवाले कौन

लेखक की कलम से : फ्रांस में निर्दोषों का गला काटने वालों का भारत में साथ देनेवाले कौन

भारत से हजारों मील दूर फ्रांस में सरकार और कठमुल्लों के बीच चल रही तनातनी के खिलाफ भारत के मुसलमानों का एक वर्ग भी आग बबूला हो उठे ।

02-Nov-2020

लेखक की कलम से :  चुनावी मौसम में यूपी-बिहार बार्डर पर शराब माफियाओं की सरगर्मी तेज

लेखक की कलम से : चुनावी मौसम में यूपी-बिहार बार्डर पर शराब माफियाओं की सरगर्मी तेज

बिहार में शराब और हथियार दोनों की ही मांग तेज हुई तो यूपी के शराब माफिया मौके का फायदा उठाने के लिए मैदान में कूद पडे़।

26-Oct-2020

लेखक की कलम से : जम्मू-कश्मीर में नजरबंदी के बाद राजनीतिक सक्रियता  

लेखक की कलम से : जम्मू-कश्मीर में नजरबंदी के बाद राजनीतिक सक्रियता  

जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी ताकतें सक्रिय हो गई हैं। उन्हें चीन और पाकिस्तान से बढ़ावा मिल रहा है। नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला के बयान कमोबेश यही संकेत देते हैं।

26-Oct-2020

लेखक की कलम से : भारत के ब्रांड एंबेसेडर ही बने रहे भारतवंशी तो बेहतर

लेखक की कलम से : भारत के ब्रांड एंबेसेडर ही बने रहे भारतवंशी तो बेहतर

न्यूजीलैंड के आम चुनाव में जैसिंडा आर्डर्न की लेबर पार्टी विजय रही है। उसे 49.1% वोट मिले हैं, जो कि करीब 64 संसद सीटों में तब्दील होंगे। 1946 के बाद से यह लेबर पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।

24-Oct-2020

 लेखक की कलम से : कश्मीर में खुराफात करने वालों बाज आओ

लेखक की कलम से : कश्मीर में खुराफात करने वालों बाज आओ

जम्मू-कश्मीर के नज़रबंद नेताओं ने रिहा होते ही फिर से अपनी पुरानी खुऱाफात चालू कर दी है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूख अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती, उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ़्रेंस, माकपा तथा जम्मू-कश्मीर अवामी नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेताओं ने हाल ही में यह मांग कर दी कि भारत सरकार राज्य के लोगों को वो सारे अधिकार फिर से वापस लौटाए जो पाँच अगस्त 2019 से पहले उनको हासिल थे। मतलब यह कि वे यह चाहते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 370 की पुनः बहाली हो जो संसद के दोनों सदनों ने रद्द कर दिया है, ताकि ये मौज कर सकें।

20-Oct-2020

लेखक की कलम से : देश के बडे़ दलित नेताओं में गिने जाते थे पासवान

लेखक की कलम से : देश के बडे़ दलित नेताओं में गिने जाते थे पासवान

रामविलास पासवान के रूप में भारतीय राजनीति का और बड़ा दलित सितारा ‘बुझ’ गया। बिहार में पिछले आधे दशक से बाबू जगजीवन राम के बाद यदि कोई दलित चेहरा चमकता रहा, वो रामविलास पासवान ही थे।

09-Oct-2020