नई दिल्ली : अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होने से पिछले कुछ समय से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं. क्रूड के दाम में आए भारी उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट स्थिर बने हुए हैं. लेकिन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को लगता है कि भारत के लिए ईंधन की कीमतों को लंबे समय तक दबाकर रखना मुश्किल होगा और अंततः पेट्रोल-डीजल का रेट बढ़ाना ही होगा.
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के एशिया पैसिफिक डिपार्टमेंट के डायरेक्टर कृष्ण श्रीनिवासन ने नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के एक कार्यक्रम में कहा कि भारत यदि सरकार लंबे समय तक बाजार की वास्तविकताओं को नजरअंदाज कर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखती है, तो इससे ‘मार्केट सिग्नल’ यानी बाजार के असली संकेत गड़बड़ा जाते हैं. एक समय ऐसा आएगा जब कीमतों को अपने हिसाब से चलने देना जरूरी होगा. उन्होंने कहा कि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती या उर्वरक सब्सिडी में बदलाव करके इस झटके को कुछ कम जरूर कर सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह टालना मुमकिन नहीं है.
$118 के करीब पहुंचा भारतीय बास्केट
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. लेकिन भारत के लिए स्थिति और भी चिंताजनक है. 30 अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का क्रूड बास्केट यानी कच्चे तेल की खरीद लागत करीब 118.70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है. हाल ही में ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरियाई कार्गो जहाजों को निशाना बनाने की खबरों ने सप्लाई चेन पर खतरा बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में अफरा-तफरी का माहौल है.
₹30 प्रति लीटर तक का नुकसान
सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) इस समय दोहरी मार झेल रही हैं. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में खुलासा किया था कि क्रूड की कीमत बढने से कंपनियां को भारी घाटा हो रहा है. तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी झेल रही हैं.
पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद से भारत में खुदरा कीमतें नहीं बढ़ी हैं. सरकारी तेल कंपनियों पर अब यह दबाव इतना बढ़ गया है कि वे और अधिक समय तक इस नुकसान को वहन करने की स्थिति में नहीं हैं. यदि सरकार उन्हें वित्तीय सहायता नहीं देती या कीमतें बढ़ाने की अनुमति नहीं देती, तो उनका परिचालन संकट में पड़ सकता है.