सोमवती अमावस्या पर शिव पूजन और दान का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या यानी सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को शास्त्रों में बेहद पुण्यदायी माना गया है। इस दिन शिव पूजन और पितृ तर्पण से अक्षय फल मिलता है और पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है।
शिव पूजन विधि: अभिषेक से प्रसन्न हों भोलेनाथ
अभिषेक: घर के पूजा स्थल या निकटतम शिवालय में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, गाय के कच्चे दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
अर्पण: भगवान शिव को बेलपत्र, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, धतूरा और बिना टूटे अक्षत चावल अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री भेंट करें।
मंत्र जाप: ॐ नमः शिवाय मंत्र का यथासंभव जाप करें। यह मन को एकाग्र करता है और पितृ दोष शांत करने में सहायक है।
दान का महत्व: अक्षय पुण्य देने वाला दिन
शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या पर किया गया दान कभी खत्म न होने वाला पुण्य देता है। अपनी क्षमतानुसार ये दान जरूर करें:
अन्नदान: चावल, दाल, आटा, घी और गुड़ का दान जरूरतमंदों को करें। इसे सबसे श्रेष्ठ दान कहा गया है।
वस्त्र और फल दान: किसी निर्धन को नए वस्त्र या मौसमी फल दान करें।
पितृ तर्पण: आज के दिन पितरों के निमित्त धूप-दीप दिखाएं और जल तर्पण करें। मान्यता है कि इससे पितृ प्रसन्न होकर कुल की उन्नति का आशीर्वाद देते हैं।
क्यों खास है सोमवती अमावस्या
सोमवार शिवजी का दिन है और अमावस्या पितरों की तिथि। दोनों का संयोग दुर्लभ होता है। इस दिन गंगा स्नान, शिव पूजन और दान से कालसर्प दोष, पितृ दोष और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करना भी बेहद शुभ माना जाता है।