नई दिल्ली : मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक गतिरोध एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों देशों के रुख आमने-सामने हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही के लिए ईरान के तय रास्ते से अलग कोई नया पैसेज बनाने या अमेरिकी युद्धपोत तैनात करने की कोशिश की, तो उस पर सीधा मिसाइल हमला किया जाएगा।
ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकार जनरल मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी कि ईरान किसी भी सूरत में अमेरिका को होर्मुज में दूसरा रास्ता नहीं बनाने देगा। उन्होंने अमेरिका द्वारा समुद्री नाकाबंदी की कोशिशों का विरोध करते हुए कहा कि अगर वॉशिंगटन ने अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया, तो अमेरिकी ठिकानों और जहाजों के लिए बेहद गंभीर स्थिति पैदा हो जाएगी।
ट्रंप और ईरान के दावों में विरोधाभास
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि तेहरान के साथ बातचीत चल रही है और यह ईरान के लिए एक अच्छा समझौता करने का आखिरी मौका है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसेना का प्रभावी नियंत्रण है।
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत की खबर को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि अमेरिका से कोई बैठक तय नहीं है और फिलहाल केवल ओमान के साथ होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर चर्चाएं की जा रही हैं।
वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर असर
यह पूरा घटनाक्रम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। बीते पाँच महीनों से जारी गतिरोध के बीच अमेरिकी चेतावनियों और ईरानी धमकियों का सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ा है, जहाँ खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 5% की गिरावट दर्ज की गई।




