केंद्र सरकार ने पूरी की ममता सरकार की ये मांग, लाखों लोगों को राहत
ममता बनर्जी


नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार की एक पुरानी मांग पूरी कर दी है. राज्य में अगले साल के शुरू में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए केंद्र सरकार ने आदेश जारी कर दिया है. इससे पश्चिम बंगाल के लाखों लोगों को राहत मिलेगी. दरअसल, पश्चिम बंगाल में तीन साल तक निलंबित रहने के बाद केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को फिर से शुरू करने का फैसला किया है. यह निर्णय कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में लिया गया है.सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ग्रामीण विकास सचिव शैलेश कुमार सिंह ने संसद की एक प्रमुख समिति, पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) को यह जानकारी दी.

यह कदम तब उठाया गया जब समिति के सांसदों ने राज्य में इस योजना के निरंतर रुकावट पर सवाल उठाए. केंद्र ने 2022 में पश्चिम बंगाल में मनरेगा को कथित अनियमितताओं के कारण निलंबित कर दिया था. इसके बाद कोलकाता हाईकोर्ट ने केंद्र के इस फैसले को पलटते हुए योजना को बहाल करने का आदेश दिया. केंद्र ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन शीर्ष अदालत ने इसे खारिज कर दिया. इसके बावजूद केंद्र ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया था कि वह इस मामले में आगे कैसे बढ़ेगा, क्योंकि कानूनी रास्ते समाप्त हो चुके थे.

पीएसी ने मनरेगा पर साढ़े तीन घंटे तक चर्चा
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता वाली पीएसी ने मनरेगा पर साढ़े तीन घंटे तक चर्चा की. इस दौरान विभिन्न दलों के सांसदों, जिनमें प्रफुल्ल पटेल, रविशंकर प्रसाद, शक्ति सिंह गोहिल, जगदंबिका पाल और धर्मेंद्र यादव शामिल थे. समिति ने योजना के कार्यान्वयन और केंद्र द्वारा तय किए गए मानदंडों पर सवाल उठाए. ग्रामीण विकास सचिव ने स्पष्ट किया कि केंद्र हाईकोर्ट के आदेश का पालन करेगा. इस पर एक कांग्रेस सांसद ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला कई महीने पहले आ चुका है, फिर भी योजना को बहाल करने में देरी हो रही है.

उन्होंने मांग की कि अब और देरी किए बिना योजना को तुरंत शुरू किया जाए.पश्चिम बंगाल में मनरेगा के निलंबन ने टीएमसी और बीजेपी के बीच लंबे समय से चल रहे राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है. टीएमसी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र पर ग्रामीण गरीबों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है, जबकि बीजेपी ने राज्य सरकार पर योजना में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. अब कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्र के इस फैसले से पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.



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