कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC में घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बागियों पर सख्त रुख अपनाते हुए दो विधायकों रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई विधानसभा में कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले में CID जांच शुरू होने के तुरंत बाद हुई। दावा है कि इन्हीं दोनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को औपचारिक शिकायत दी थी, जिसके आधार पर जांच शुरू हुई।
सियासी संकट तब और गहरा गया जब सोमवार को ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित आवास पर सभी विधायकों की बैठक बुलाई, लेकिन करीब 60 विधायक नहीं पहुंचे। मीटिंग रद्द करनी पड़ी। TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने दावा किया कि विधायकों ने फोन कर बताया था कि वे इलाकों में हिंसा के विरोध में लड़ाई लड़ रहे हैं।
संदीपन साहा का खुला आरोप
निष्कासित विधायक संदीपन साहा ने बैठक में न जाने की वजह सार्वजनिक कर दी। उन्होंने कहा कि पार्टी नेता, उपनेता और चीफ व्हिप की नियुक्ति पर पहले ही बैठक हो चुकी थी और प्रस्ताव पारित हो गया था। बाद में पता चला कि प्रस्ताव विधानसभा भेजने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार नहीं थी, इसलिए जांच हुई। "जब एक बार बैठक हो चुकी थी तो दोबारा बुलाने का औचित्य क्या था? क्या इस बार सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई?" साहा ने सवाल उठाया। इसे TMC के अंदर बड़ी बगावत माना जा रहा है।
अरूप राय भी बागी तेवर में
पूर्व मंत्री और सेंट्रल हावड़ा विधायक अरूप राय ने भी पार्टी नेतृत्व पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि TMC सांसद-विधायक-कार्यकर्ता लगातार हमलों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन नेतृत्व चुप है। शनिवार को उनके घर पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और "चोर-चोर" के नारे लगाए। उनके गोदाम से सरकारी राहत सामग्री मिलने का दावा किया गया। अरूप राय बोले, "मेरे घर हमले के बाद भी पार्टी के किसी नेता ने हालचाल नहीं पूछा। विधायक समीर पांजा, सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले हुए, लेकिन पार्टी चुप है।"
उन्होंने कहा कि पार्टी पहले भी चुनाव हारी है, लेकिन तब कार्यकर्ता आत्मविश्वास से राजनीति करते थे। मौजूदा हालात उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में नहीं देखे। वे थाने में FIR दर्ज कराएंगे और पार्टी कार्यक्रमों में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं।