लखनऊ/दिल्ली: पिछले तीन सालों से कानूनी और राजनीतिक अखाड़े में जारी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत मिली है। अदालत से सभी आरोपों में बरी (क्लीन चिट) होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या 'नेता जी' एक बार फिर चुनावी दंगल में उतरने जा रहे हैं?
कैसे लगा था करियर पर ब्रेक?
साल 2023 में महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक ग्राफ अचानक थम सा गया था। विवादों के दबाव में पार्टी ने 2024 के आम चुनावों में उनका टिकट काट दिया था, हालांकि उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीत भी दर्ज की। लेकिन, बृजभूषण का खुद अग्रिम मोर्चे से गायब रहना उनके समर्थकों को खटक रहा था।
क्लीन चिट के बाद बदले सियासी समीकरण
कोर्ट से राहत मिलते ही बृजभूषण के समर्थकों में जश्न का माहौल है। पूर्वांचल की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले बृजभूषण के बारे में माना जा रहा है कि वे अब खामोश बैठने वाले नहीं हैं।
कैसरगंज और देवीपाटन मंडल में दबदबा: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस इलाके में उनका जनाधार आज भी बरकरार है।
पार्टी की रणनीति: अब देखना यह होगा कि बीजेपी आलाकमान उन्हें संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपता है या आगामी उप-चुनावों/आगामी चुनावों में दोबारा चुनावी मैदान में उतारता है।
क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?
"बृजभूषण शरण सिंह केवल एक नेता नहीं, बल्कि अवध क्षेत्र के बड़े क्षत्रप माने जाते हैं। कोर्ट से बरी होने के बाद उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता फिर से बढ़ गई है। उनका कमबैक विरोधियों के लिए नई चुनौती पेश करेगा।"
फिलहाल, बृजभूषण सिंह के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कानूनी जंग जीतने के बाद वे अपनी सियासी पिच पर पहला शॉट किस अंदाज में खेलते हैं!