नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश के राजनीतिक और निर्वाचन परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े ऐतिहासिक संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र (Special Session) बुलाया जा सकता है। मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने के बाद संसद का सत्रावसान (Prorogation) न करके, 17 अगस्त से तीन दिवसीय विशेष सत्र की घोषणा की संभावना जताई जा रही है।
संविधान संशोधन से जुड़े इन विधेयकों को पारित कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसके लिए सरकार विपक्षी दलों के साथ आम सहमति और समर्थन का अंकगणित साध रही है।
क्या है परिसीमन विधेयक 2026?
संसद में पेश किए गए नए विधायी ढांचे के तहत मुख्य रूप से परिसीमन विधेयक-2026 (Delimitation Bill 2026) का मसौदा तैयार किया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य एक नए परिसीमन आयोग का गठन करना है, जो नवीनतम उपलब्ध जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर देश भर की संसदीय व विधानसभा सीमाओं का पुनर्गठन करेगा।
इसी के साथ लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को दिए गए 33 फीसदी (एक-तिहाई) आरक्षण को शीघ्रता से धरातल पर उतारना भी इसका मुख्य मकसद है।
लोकसभा का होगा ऐतिहासिक विस्तार: सीटें होंगी 850 तक
वर्तमान में लोकसभा सीटों की संख्या (543) और राज्यों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर तय है, जिसे 2026 तक के लिए फ्रीज (स्थिर) कर दिया गया था।
सीटों में बढ़ोतरी: नए संशोधन के तहत लोकसभा सदस्यों की अधिकतम क्षमता बढ़ाकर 850 (राज्यों के लिए अधिकतम 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें) करने का प्रस्ताव है।
जनसंख्या का संतुलन: नई सीमाओं का निर्धारण इलाकों के जनसंख्या घनत्व (Population Density) के अनुसार होगा, ताकि हर जनप्रतिनिधि के पास समान आबादी का प्रतिनिधित्व हो।
परिसीमन का सीधा असर आप पर कैसे पड़ेगा?
सरल शब्दों में, परिसीमन का अर्थ है—चुनावी क्षेत्रों (Constituencies) की भौगोलिक सीमाओं का पुनर्गठन करना।
वार्ड से लेकर लोकसभा तक बदलाव: जैसे निकाय चुनावों में आबादी बढ़ने पर आपका वार्ड बदल जाता है (उदा. वार्ड नंबर 10 से वार्ड नंबर 12), ठीक वैसे ही संसदीय क्षेत्रों की सीमाएं भी पुनर्गठित होंगी।
रोटेशन के साथ महिला आरक्षण: आरक्षित सीटों को हर चुनाव में रोटेट किया जाएगा, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों की महिला प्रतिनिधियों को संसद पहुंचने का अवसर मिल सके।
भारत में परिसीमन का इतिहास
1952: पहली बार 489 सीटें थीं।
1963: 1961 की जनगणना के आधार पर सीटें बढ़कर 522 हुईं।
1973: 1971 की जनगणना के आधार पर 543 सीटें तय की गईं, जो आज तक लागू हैं।
2002: वर्ष 2002 में परिसीमन आयोग बना था, लेकिन तब सीटों की कुल संख्या बढ़ाए बिना केवल सीमाओं का समायोजन किया गया था।