नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में गहराते सैन्य संघर्ष और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते प्रत्यक्ष टकराव के चलते ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर 97.88 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर जा पहुंचा है, जो पिछले कई महीनों का उच्चतम स्तर है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 92.51 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में आई इस तेजी ने भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ा दिया है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि 'इंडियन क्रूड बास्केट' का औसतन आयात मूल्य वर्तमान वैश्विक दरों से भी अधिक यानी 99.38 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। बीते दिनों यह आंकड़ा 101 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी छू चुका है, जबकि जून और जुलाई के महीनों में यह औसत 82 से 83 डॉलर प्रति बैरल के करीब था।
तेल की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष है। अमेरिकी नौसैनिक पोतों पर मिसाइल हमले और उसके जवाब में अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने से सप्लाई चेन बाधित हुई है। इसके अलावा, सऊदी अरब के जिजान स्थित अरामको की विशाल रिफाइनरी पर हमले की खबर ने आपूर्ति संकट की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी होने के कारण भारत आने वाले जहाजों का मालभाड़ा 400% से अधिक बढ़ गया है। जून तिमाही के दौरान कम मात्रा में आयात करने के बावजूद भारत को तेल आयात के लिए करीब 60% अधिक विदेशी मुद्रा चुकानी पड़ी है, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की दरें प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।




