नई दिल्ली : ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है. मंगलवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ईरान के लोगों से विरोध प्रदर्शन जारी रखने की अपील की. उन्होंने लिखा, "ईरानी देशभक्तों, प्रोटेस्ट जारी रखो, अपने संस्थानों पर कब्जा करो. मदद रास्ते में है." हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मदद किस तरह की होगी.
ट्रंप ने यह भी कहा कि जब तक प्रदर्शनकारियों की "बेतुकी हत्याएं" बंद नहीं होतीं, तब तक उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी तरह की बातचीत रद्द कर दी है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान की धार्मिक नेतृत्व वाली सरकार हाल के वर्षों के सबसे बड़े जन आंदोलनों से निपटने के लिए सख्ती बढ़ा रही है.
ईरान में यह अशांति गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी के चलते भड़की है. यह पिछले कम से कम तीन वर्षों में ईरानी सत्ता के लिए सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती मानी जा रही है. हालात ऐसे समय में बिगड़े हैं, जब इजरायल और अमेरिका की ओर से पिछले साल किए गए सैन्य हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव पहले से ही बढ़ा हुआ है.
मंगलवार को एक ईरानी अधिकारी ने पहली बार स्वीकार किया कि दो हफ्तों से ज्यादा समय से चल रहे प्रदर्शनों में करीब 2000 लोगों की मौत हो चुकी है. अधिकारी ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों दोनों की मौत के पीछे "आतंकवादी तत्व" जिम्मेदार हैं. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि मरने वालों में आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की संख्या कितनी है.
इस बीच सोमवार को ट्रंप ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश के उत्पादों पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का ऐलान किया. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई समेत अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है.
ईरान की ओर से टैरिफ पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चीन ने इस फैसले की आलोचना की है. ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है और अपने ज्यादातर तेल का निर्यात चीन को करता है. इसके अलावा तुर्की, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और भारत भी ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने कहा कि प्रदर्शनों के दौरान भी अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से संपर्क बना हुआ है और वॉशिंगटन के प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है. वहीं, ईरानी सरकार लगातार अमेरिका और इजरायल पर अशांति भड़काने का आरोप लगा रही है.
ईरान में यह अशांति गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी के चलते भड़की है. यह पिछले कम से कम तीन वर्षों में ईरानी सत्ता के लिए सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती मानी जा रही है. हालात ऐसे समय में बिगड़े हैं, जब इजरायल और अमेरिका की ओर से पिछले साल किए गए सैन्य हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव पहले से ही बढ़ा हुआ है.
मंगलवार को एक ईरानी अधिकारी ने पहली बार स्वीकार किया कि दो हफ्तों से ज्यादा समय से चल रहे प्रदर्शनों में करीब 2000 लोगों की मौत हो चुकी है. अधिकारी ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों दोनों की मौत के पीछे "आतंकवादी तत्व" जिम्मेदार हैं. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि मरने वालों में आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की संख्या कितनी है.
इस बीच सोमवार को ट्रंप ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश के उत्पादों पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का ऐलान किया. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई समेत अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है.
ईरान की ओर से टैरिफ पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चीन ने इस फैसले की आलोचना की है. ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है और अपने ज्यादातर तेल का निर्यात चीन को करता है. इसके अलावा तुर्की, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और भारत भी ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने कहा कि प्रदर्शनों के दौरान भी अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से संपर्क बना हुआ है और वॉशिंगटन के प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है. वहीं, ईरानी सरकार लगातार अमेरिका और इजरायल पर अशांति भड़काने का आरोप लगा रही है.




