बुशहर/होर्मुज : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के बुशहर प्रांत में कई मछली पकड़ने वाली नावों पर हमला कर दिया। अमेरिका का दावा है कि निशाना IRGC की स्पीड बोट्स थीं, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स में सिविलियन मछुआरों की नावें, डॉक और पियर जलते दिख रहे हैं।
क्या हुआ बुशहर में?
IRGC द्वारा व्यावसायिक टैंकरों पर हमले के जवाब में अमेरिका ने दक्षिण-पश्चिम ईरान के तटीय इलाकों पर स्ट्राइक की। बुशहर में फिशिंग बोट्स आग की चपेट में आईं। वीडियो में दमकलकर्मी आग बुझाते दिख रहे हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सैकड़ों मछुआरों की आजीविका छिन गई।
अमेरिका का कहना है कि लक्ष्य रडार, कोस्टल डिफेंस और IRGC की फास्ट बोट्स थे। लेकिन ईरान ने सैन्य ठिकाने छिपा लिए या मोबाइल कर दिए हैं। इससे सटीक निशाना चूक रहा है और बुशहर जैसे इलाके में मछली नावें निशाना बन रही हैं।
'कोलैटरल डैमेज' या युद्ध अपराध?
ईरान इसे जानबूझकर नागरिकों पर हमला बता रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन है। बुशहर के पास परमाणु संयंत्र है, जिसे अमेरिका ने निशाना न बनाने की सफाई दी है। फिर भी रेडियोएक्टिव खतरे की आशंका जताई जा रही है। मछुआरे पहले से आर्थिक दबाव में थे, अब बेरोजगारी और भुखमरी का खतरा बढ़ गया है।
होर्मुज संकट क्यों बढ़ा?
IRGC ने होर्मुज में टैंकरों पर हमले किए, जिसे अमेरिका ने सीजफायर उल्लंघन कहा। जवाब में सैकड़ों सैन्य लक्ष्यों पर स्ट्राइक हुई। लेकिन असममित युद्ध में IRGC की स्विफ्ट बोट्स, ड्रोन और मिसाइल अमेरिकी नौसेना के लिए चुनौती बन रहे हैं। संकरा होर्मुज स्ट्रेट में सटीक हमला मुश्किल है।
आगे क्या असर पड़ेगा?
तेल की कीमतें पहले ही ऊपर हैं। अगर ईरान जवाब देता है तो खाड़ी के देश सऊदी, यूएई, कुवैत और भारत-चीन जैसे आयातक परेशान होंगे। मानवाधिकार संगठन हमले की निंदा कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में बहस है कि यह आनुपातिक जवाब था या अति।
बुशहर की जली नावें अब सिर्फ नावें नहीं, बल्कि युद्ध में आम आदमी की कीमत का प्रतीक बन गई हैं। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि बिना जमीनी खुफिया के ऐसे हमले ब्लाइंड स्ट्राइक बन जाते हैं और तनाव और बढ़ाते हैं।




