ब्रिक्स 2026: पुतिन और जिनपिंग का रूट और होटल कौन करता है तय? जानिए विदेश मंत्रालय का सीक्रेट प्रोटोकॉल
जब पुतिन या जिनपिंग का काफिला निकलता है, तो सड़क का चुनाव केवल ट्रैफिक स्थिति देखकर नहीं होता।


नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स समिट 2026 की गूंज है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत दुनिया भर के दिग्गज नेता भारत की सरजमीं पर कदम रख रहे हैं। एयरपोर्ट से लेकर होटल तक, अभेद्य सुरक्षा घेरा, खाली सड़कें और दर्जनों गाड़ियों का काफिला... यह नजारा हर किसी का ध्यान खींचता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि VVIP मेहमानों का यह पूरा रूट और उनके ठहरने का होटल आखिरकार तय कौन करता है? क्या यह फैसला विदेशी सुरक्षा टीमें लेती हैं या भारत सरकार का कोई खास तंत्र?

विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक प्रोटोकॉल हैंडबुक इस पूरी व्यवस्था की परतें खोलती है।

परदे के पीछे का 'मास्टरमाइंड': प्रोटोकॉल-1 सेक्शन विदेशी नेताओं की आवभगत से लेकर सुरक्षा तालमेल तक का पूरा जिम्मा विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल डिविजन के पास होता है। इसके तहत कई सेक्शन काम करते हैं, लेकिन सबसे अहम भूमिका प्रोटोकॉल-1 सेक्शन निभाता है।

किसकी कमान? यह सेक्शन 'डेपुटी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल (सेरेमनीज)' और 'चीफ ऑफ प्रोटोकॉल' की देखरेख में काम करता है।

क्या है काम? किसी भी देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति या विदेश मंत्री की भारत यात्रा का आधिकारिक खाका (ब्लूप्रिंट), स्वागत और विदाई की पूरी व्यवस्था यही टीम संभालती है।

रूट कौन बनाता है: दिल्ली पुलिस या विदेश मंत्रालय? जब पुतिन या जिनपिंग का काफिला निकलता है, तो सड़क का चुनाव केवल ट्रैफिक स्थिति देखकर नहीं होता।

संयुक्त रणनीति: काफिले का रूट तय करना किसी एक अधिकारी या अकेले पुलिस का फैसला नहीं होता। प्रोटोकॉल-1 सेक्शन, सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय पुलिस (जैसे दिल्ली पुलिस) आपस में मिलकर रूट फाइनल करते हैं।

सुरक्षा प्रोटोकॉल: 'डेपुटी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल (प्रिविलेज)' और 'प्रोटोकॉल अफसर-2' जैसी टीमें सुरक्षा एजेंसियों के साथ सीधे संपर्क में रहती हैं। आपातकालीन रास्तों और ट्रैफिक डायवर्जन पर अंतिम मुहर इसी तालमेल के बाद लगती है।

होटल का चयन: कैसे तय होता है VVIP ठिकाना? विदेशी मेहमान किस 5-स्टार होटल में ठहरेंगे, यह फैसला भी यात्रा के सुरक्षा प्लान और प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है।

हैंडबुक के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य, ठहरने की अवधि और कार्यक्रम स्थल से दूरी जैसे मानकों को ध्यान में रखकर विकल्पों पर चर्चा की जाती है।

विदेशी दूतावासों की पसंद, सुरक्षा ऑडिट और भारत सरकार के हॉस्पिटैलिटी नियमों के समन्वय के बाद ही ठहरने की जगह फाइनल होती है।

विदेशी सुरक्षा टीम बनाम भारतीय एजेंसियां पुतिन और जिनपिंग जैसे वैश्विक नेता अपनी पर्सनल सिक्योरिटी टीम के साथ भारत आते हैं। हालांकि, भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही कमान भारतीय सुरक्षा तंत्र और स्थानीय पुलिस के प्रोटोकॉल नियमों के अधीन हो जाती है। विदेशी टीमें भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर ही सुरक्षा घेरा तैयार करती हैं।

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