नई दिल्ली : वैश्विक पटल पर रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद अहम और चौंकाने वाला बयान सामने आया है। आयरलैंड ओपन गोल्फ टूर्नामेंट के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों को निशाना न बनाने की साफ सलाह दी है। ट्रंप का मानना है कि यूक्रेनी हमलों के कारण रूस में डीजल और अन्य ईंधनों की भारी किल्लत पैदा हो रही है, जिससे आम आपूर्ति व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।
अक्सर युद्ध विराम की वकालत करने वाले डोनाल्ड ट्रंप से जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई उनकी हालिया बातचीत और उसके बाद जेलेंस्की से संपर्क को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने रूस के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर चिंता जताई। ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन को अपनी सैन्य रणनीतियों में बदलाव करना चाहिए। उनके अनुसार, यूक्रेनी सेना चाहे तो अन्य रूसी सैन्य ठिकानों पर अपने हमले जारी रख सकती है, लेकिन उन्हें डीजल डिपो और रिफाइनरी जैसे बेहद संवेदनशील ठिकानों को बख्शना होगा।
गौरतलब है कि पिछले लंबे समय से जारी इस युद्ध में दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक और आर्थिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाते रहे हैं। यूक्रेन लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए रूस के ऊर्जा क्षेत्र को पंगु बनाने की कोशिश में जुटा है, जिससे रूस की अर्थव्यवस्था और युद्ध क्षमता दोनों पर असर पड़ा है। हालांकि, ट्रंप की यह नई टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि वे ईंधन बाजार में आ रही अस्थिरता को रोकने के पक्षधर हैं।
ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां शांति वार्ताओं की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप की ओर से यूक्रेन को हमले के लक्ष्य बदलने की हिदायत यह दर्शाती है कि आने वाले समय में अमेरिकी रुख युद्ध की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।




