कर्ज में डूबी वोडाफोन आइडिया को मिल सकता है नया ‘मालिक’?
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नई दिल्‍ली : संकट में फंसी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया (Vodafone Idea) को जल्द ही नया ‘मालिक’ मिल सकता है. अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फर्म टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स (Tillman Global Holdings – TGH) कंपनी में 4 से 6 अरब डॉलर (करीब ₹35,000 से ₹52,800 करोड़) का निवेश करने की योजना बना रही है. एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, यह डील तभी संभव है जब भारत सरकार वोडाफोन-आइडिया के सभी बकायों पर एक समग्र राहत पैकेज देने को तैयार हो जाए, जिसमें एजीआर (AGR) और स्पेक्ट्रम पेमेंट जैसी देनदारियां शामिल हैं.

टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स एक अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म है जो डिजिटल और एनर्जी ट्रांजिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करती है. कंपनी के चेयरमैन और सीईओ संजय आहूजा हैं, जिन्हें 2003 से 2007 के बीच फ्रांस की टेलीकॉम कंपनी ऑरेंज को turnaround करने का श्रेय दिया जाता है. TGH के पास पहले से ही टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइबर और टावर एसेट्स में निवेश है, और इसे टेलीकॉम ऑपरेशन संभालने का गहरा अनुभव है.

TGH को मिल सकता है प्रमोटर का दर्जा
वोडाफोन के पास कंपनी की 16.07% और आदित्य बिड़ला ग्रुप के पास 9.50% हिस्सेदारी है. सूत्रों का कहना है कि अगर समझौता होता है तो TGH को प्रमोटर का दर्जा मिलेगा और वह कंपनी के वर्तमान मालिकों आदित्य बिड़ला ग्रुप और यूके की वोडाफोन ग्रुप से संचालन की बागडोर अपने हाथ में ले लेगा. भारत सरकार के पास भी वोडा-आइडिया में 48.99% हिस्सेदारी है. अगर टीजीएच को प्रमोटर का दर्जा मिलता है तो भी सरकार पेसिव इन्‍वेस्‍टर के तौर पर कंपनी में बनी रहेगी.

कर्ज में दबी है कंपनी
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, TGH ने निवेश के लिए सरकार को विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है. यह निवेश तभी होगा जब सरकार कंपनी के ऊपर चढ़े कर्ज और देनदारियों के बोझ को हल्का करने के लिए कोई ठोस पैकेज लाए. कंपनी पर ₹84,000 करोड़ से ज्यादा के नियामक देनदारियां हैं, जिनमें ब्याज और जुर्माना शामिल है.

पिछले साल सरकार ने कुछ बकाये को इक्विटी में बदलकर हिस्सेदारी हासिल की थी, लेकिन कंपनी अब भी आर्थिक संकट से जूझ रही है. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में Vi को कुछ राहत दी थी, लेकिन यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि यह राहत सभी एजीआर बकायों पर लागू होगी या केवल ₹9,000 करोड़ के अतिरिक्त दावे तक सीमित रहेगी.

पहले भी हो चुकी है बातचीत
यह पहली बार नहीं है जब TGH और वोडाफोन-आइडिया के बीच बातचीत हो रही है. सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लगभग 18 महीनों तक निवेश को लेकर चर्चा चली थी. लेकिन पिछले साल Vi ने संस्थागत निवेशकों को शेयर बेचकर फंड जुटाने का फैसला किया, जिसके बाद TGH पीछे हट गया था. अब जब कंपनी की स्थिति फिर कमजोर हुई है बातचीत दोबारा तेज हो गई है. एक सूत्र ने कहा, “यह एक दो-तरफा समझौता होगा अगर सरकार बकायों पर राहत देगी तो TGH निवेश करेगा, और निवेश की शर्त पर ही राहत पैकेज दिया जाएगा.”


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