लेखक की कलम से : देश के बडे़ दलित नेताओं में गिने जाते थे पासवान

लेखक की कलम से : देश के बडे़ दलित नेताओं में गिने जाते थे पासवान

रामविलास पासवान के रूप में भारतीय राजनीति का और बड़ा दलित सितारा ‘बुझ’ गया। बिहार में पिछले आधे दशक से बाबू जगजीवन राम के बाद यदि कोई दलित चेहरा चमकता रहा, वो रामविलास पासवान ही थे।

09-Oct-2020

लेखक की कलम से : कब बिहार में टाटा, रिलायंस, इंफोसिस भी करेंगे निवेश

लेखक की कलम से : कब बिहार में टाटा, रिलायंस, इंफोसिस भी करेंगे निवेश

बिहार एक बार फिर से चुनावी समर के लिए तैयार है। राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नेताओं का जनसंपर्क अभियान जारी है । अब जल्दी ही वहां चुनावी सभाएं भी चालू हो जाएंगी।

08-Oct-2020

लेखक की कलम से : लाखों बिजली कर्मियों की हड़ताल से यूपी बदहाल

लेखक की कलम से : लाखों बिजली कर्मियों की हड़ताल से यूपी बदहाल

निजीकरण के विरोध में करीब 15 लाख बिजली कर्मियों की अनिश्चित कालीन हड़ताल ने योगी सरकार को हिला कर रख दिया है। इन कर्मचारियों में जूनियर इंजीनियर, उप-विभागीय अधिकारी, कार्यकारी इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता शामिल हैं। बिजली कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लिया तो बिजली कर्मी अपना आंदोलन और तेज करेंगे।

06-Oct-2020

लेखक की कलम से : औवेसी जी, अब तो बंद करो कोर्ट का अनादर करना

लेखक की कलम से : औवेसी जी, अब तो बंद करो कोर्ट का अनादर करना

कथित बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद फिर से उम्मीद के मुताबिक ही कुछ सेक्युलरवादी और कठमुल्ले विरोध जता रहे हैं।

02-Oct-2020

लेखक की कलम से : मोदी सरकार का नया संकट,कोरोना काल में बढ़ी बेरोजगारी

लेखक की कलम से : मोदी सरकार का नया संकट,कोरोना काल में बढ़ी बेरोजगारी

एक तरफ केन्द्र की मोदी सरकार निजीकरण की ओर बढ़ रही है तो दूसरी ओर उस पर इस बात का दबाव है कि वह युवाओं के लिए अधिक से अधिक सरकारी नौकरियों की व्यवस्था करे।

27-Sep-2020

तो क्या ये मीडिया के अंत की शुरुवात है....

तो क्या ये मीडिया के अंत की शुरुवात है....

भारत मे आज के प्रतिष्ठित चैनल न तो सरकार की कमियों पर बात करना चाहते है और न ही आम जनमानस के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहते फिर हम इन्हें क्यो देखें, क्यो इन्हें देखने के अपना समय बर्बाद करें यही कारण कि न्यूज चैनल देखना मैंने बंद कर दिया।

24-Sep-2020

सोशल मीडिया पर #Couplechallenge  क्यों हो रहा है ट्रेंड?

सोशल मीडिया पर #Couplechallenge क्यों हो रहा है ट्रेंड?

डिजिटल प्लेटफार्म पर अक्सर कोई ना कोई चैलेंज शुरू होता है और ये तेजी से वायरल भी होने लगते हैं. कोरोनाकाल में सोशल मीडिया पर ऐसे कई ट्रेंड्स देखने को मिले हैं

24-Sep-2020

लेखक की कलम से : योगी फिल्म सिटी बनाएं, ‘यूपी बनाम महाराष्ट्र’ नहीं

लेखक की कलम से : योगी फिल्म सिटी बनाएं, ‘यूपी बनाम महाराष्ट्र’ नहीं

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने उस मुम्बई को आइना दिखा दिया है जो बाॅलीबुड के चलते इतराया करता है। बाॅलीबुड की पहचान हिन्दी फिल्मों से जुड़ी है। बाॅलीबुड में करीब 80 प्रतिशत कलाकार, लेखक, निर्देशक, गीतकार, संगीतकार,टेक्नीशियन और अन्य स्टाफ उत्तर भारत से आकर अपनी किस्मत अजमाता है।  

24-Sep-2020

लेखक की कलम से : राष्ट्रीय सुरक्षा से ऊपर नहीं पत्रकार

लेखक की कलम से : राष्ट्रीय सुरक्षा से ऊपर नहीं पत्रकार

चीन के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार वरिष्ठ पत्रकार राजीव शर्मा की गिरफ्तारी ने इस ज्वलंत बहस को जन्म दे दिया है कि क्या पत्रकारों को कुछ भी करने की छूट मिली हुई है?

24-Sep-2020

लेखक की कलम से : देश विरोधी छवि के चलते अलग-थलग पड़ती कांग्रेस

लेखक की कलम से : देश विरोधी छवि के चलते अलग-थलग पड़ती कांग्रेस

उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक को समाजवादी पार्टी का मजबूत आधार माना जाता है। मुसलमान जब तक कांगे्रस के साथ रहे तब तक यूपी में कांगे्रस की तूती बोलती रही, लेकिन अयोध्या विवाद के चलते कांगे्रस से मुसलमान और हिन्दू दोनों खिसक गए,जिसके चलते यूपी में कांगे्रस तीस वर्षो से सत्ता का वनवास झेल रही है।

22-Sep-2020

लेखक की कलम से : एक तरफ काल, दूसरी ओर आक्सीजन की कालाबाजारी

लेखक की कलम से : एक तरफ काल, दूसरी ओर आक्सीजन की कालाबाजारी

कोरोना महामारी में भी कुछ ‘शैतानी ताकतें’ अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही हैं। लाॅक डाउन के समय जरूरत की चीजों की कैसे कालाबाजारी हुई थी,किसी से छिपा नहीं है।

18-Sep-2020

लेखक की कलम से : ...हो सके तो खुद को संभाल लो

लेखक की कलम से : ...हो सके तो खुद को संभाल लो

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान एक चेप्टर सामने आया था प्रोपोगंडा एजेंडा सेटिंग का, जिसके मुताबिक सरकार जब मूल मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना चाहती है तो बड़े ही पारंपरिक तरीके से एक सेट एजेंडे को मीडिया के सामने रखती है और मीडिया भी विशुद्ध पैरोकार को तरह उस एजेंडे पर काम करना शुरू कर देती है।

17-Sep-2020

लेखक की कलम से : एक तरफ काल, दूसरी ओर आक्सीजन की कालाबाजारी

लेखक की कलम से : एक तरफ काल, दूसरी ओर आक्सीजन की कालाबाजारी

कोरोना महामारी में भी कुछ ‘शैतानी ताकतें’ अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही हैं। लाॅक डाउन के समय जरूरत की चीजों की कैसे कालाबाजारी हुई थी,किसी से छिपा नहीं है। आटा जैसी आवश्वयक वस्तु बाजार से गायब हो गई थी,जो आटा आम दिनों में 20-22 रूपए किलो बिकता था,वह तीस रूपए किलो तक बेचा गया।

17-Sep-2020

लेखक की कलम से : बच्चन परिवार जिसे ‘नेकनामी-बदनामी’ दोनों मिलीं

लेखक की कलम से : बच्चन परिवार जिसे ‘नेकनामी-बदनामी’ दोनों मिलीं

फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स कनेक्शन और उस पर राज्यसभा में जया बच्चन द्वारा दिये गये बयान के चलते बच्चन परिवार एक बार फिर विवादों में आ गया है। बच्चन परिवार को अहसान फरामोश बताया जा रहा है। उसे याद दिलाया जा रहा है कि किस तरह से उसने समाजवादी नेता अमर सिंह के अहसान का बदला बेरूखी के साथ चुकाया था।  

17-Sep-2020